प्रेमचंद का दर्शन : सामान्य जीवन, समाजबोध और प्रगति के मानक

दर्शन अखाड़ा पर एक वार्ता

28 जुलाई 2019

शाम 5 बजे

प्रेमचंद (जन्म 31 जुलाई 1880) वाराणसी शहर से सटे हुए लमही गाँव के निवासी थे. चूँकि 31 जुलाई को शहर में और लमही में कार्यक्रम होते हैं, हमने सोचा कि रविवार 28 जुलाई को कुछ बातचीत दर्शन अखाड़ा पर हो जाये. प्रेमचंद के दर्शन पर कुछ बात हो.

साहित्य, कला और सृजन के पीछे एक दर्शन और विश्व दृष्टि न हो तो वह कालजयी कैसे हो सकता है? आइये, प्रेमचंद को एक दार्शनिक के रूप में देखने का प्रयास किया जाए. खोजा जाये आज के लिए कैसी भावी दृष्टि की विरासत उनसे मिलती है. हमें लगा कि सामान्य जीवन, समाजबोध व प्रगति के मानक के सन्दर्भों में बातचीत से कुछ प्रस्थान बिंदु मिल सकते हैं.

विद्या आश्रम साहित्य में दर्शन की खोज का हिमायती है. हम उसकी जाँच की बात को ठीक नहीं समझते. दर्शन ढूंढ़ें तो अक्ल में कुछ इजाफा हो सकता है.

प्रेमचंद को कमोबेश हम सबने पढ़ा है. उनके लेखन पर चिंतन भी किया है. आपसे अनुरोध है कि एक डेढ़ पेज या दो पेज इस पर लिख कर भेजें. वार्ता में शामिल हों और अपनी बात कहें. फेसबुक पर ही लिखकर भेज दें या फिर विद्या आश्रम के ई–मेल vidyaashram@gmail.com पर.

सुनील सहस्रबुद्धे (9839275124)                                                        गोरखनाथ (9450542636)

दर्शन अखाड़ा स्थान : ए 11/13 नया महादेव, राजघाट, वाराणसी, राजघाट (भैंसासुर घाट) पर रविदास मंदिर से दशाश्वमेध की ओर बढ़ने पर सुलभ शौचालय के पीछे पंच अग्नि अखाड़ा के बीस कदम आगे

 

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